• Welcome To Rashtriya Swaraj Parishad

Home / RSP Movements

शिक्षा का राष्ट्रीयकरण अभियान (Nationalisation of Education Mission)

  हमारी शिक्षा व्यवस्था की सबसे बड़ी विडम्बना यह है कि इसे सरकारी और निजी स्कूलों में बांट दिया गया है। इस कृत्रिम तरह के अनैतिक बंटवारे के कारण एक नए प्रकार का वर्गभेद पैदा हो गया है और दुर्भाग्य से इस वर्गभेद को लगातार मजबूत किया जाता रहा है। 

   निजी शिक्षण संस्थाएं आज शैक्षणिक सामंतवाद का प्रतीक बन गए हैं और समानता का दम्भ भरने वाले हमारे लोकतन्त्र को चुनौती दे रहे हैं।  इस नव सामंतवादी वर्गभेद को 'शिक्षा का अधिकार' के लालीपाप से ढकने का प्रयास किया गया है। किंतु यह मात्र छलावा जैसा ही है।

     आज यदि आरक्षण की व्यवस्था अपना वास्तविक लक्ष्य नहीं हासिल कर पा रहा है, तो इसका सबसे बड़ा कारण नए किस्म का यह वर्गभेद है। समान शिक्षा के लिए कदम उठाने के साथ इस वर्गभेद को मिटाकर आरक्षण के एक तिहाई लक्ष्य को हम प्राप्त कर सकते हैं।

     राष्ट्रीय स्वराज परिषद शिक्षा व्यवस्था में आमूलचूल बदलाव करने की वकालत करता है। यह आमूलचूल बदलाव है - 'सरकारी व निजी स्कूलों में शिक्षा के बंटवारे को समाप्त कर शिक्षा का राष्ट्रीयकरण'। रा.स्व.प. 'शिक्षा का राष्ट्रीयकरण अभियान : एक राष्ट्र, एक बुनियादी शिक्षा' के माध्यम से हाईस्कूल तक की शिक्षा का राष्ट्रीयकरण करने का अभियान चला रहा है। इसके अंतर्गत- 

(क). सभी बच्चों को हाईस्कूल तक की 'राष्ट्रीय शिक्षा' केवल सार्वजनिक स्कूलों में निःशुल्क दिया जाएगा। जनपद में रहने वाले जिलाधिकारी का बच्चा हो या सांसद या मंत्री का बच्चा या किसी पूंजीपति या किसान या मजदूर का बच्चा, सबके लिए एक ही तरह की स्थानीय सार्वजनिक विद्यालयों में पढ़ने की व्यवस्था होगी;

(ख). सभी तरह के निजी स्कूल एवं धर्म आधारित/ धर्म संचालित स्कूल एवं मदरसे बन्द होंगे। किंतु राष्ट्रीय शिक्षा के अलावा धार्मिक शिक्षा अलग से ग्रहण करने की आजादी होगी;

(ग). इंटरमीडिएट कोर्स समाप्त कर दिया जाएगा और हाईस्कूल कोर्स की अवधि द्विवर्षीय के स्थान पर तीनवर्षीय होगा। हाईस्कूल के बाद युवाओं को तुरंत प्रोफेशनल या स्नातक कोर्स करने की आजादी होगी;

(घ). हाईस्कूल तक की शिक्षा के संचालन के लिए "राष्ट्रीय प्राथमिक एवं माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (नेशनल बोर्ड आफ बेसिक एंड सेकेंडरी एजुकेशन)" होगा, जो सभी तरह के बोर्ड चाहे सीबीएसई या आईसीएससीई जैसे केंद्रीय बोर्ड हों या राज्य स्तरीय बोर्ड हों, का स्थान लेकर एकीकृत तरीके से कार्य करेगा;

(ड). प्रत्येक कक्षा के लिए एकसमान पाठ्यक्रम पूरे देशभर में लागू किया जाएगा, चाहे वह किसी भी भाषा में पढ़ाया जाए। संघीय ढांचे के नाम पर अलग-अलग राज्यों में रहने वाले भारतीयों के मध्य पाठ्यक्रम का भेदभाव समाप्त होगा;

(च). पूर्वस्नातक कक्षाओं के लिए पुस्तक का वितरण सार्वजनिक लाइब्रेरी के माध्यम से होगा;

(छ) जन्म पंजीकरण के साथ ही एक बच्चे का शिक्षा पंजीकरण कराना भी अनिवार्य होगा।