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About RSP

राष्ट्रीय स्वराज परिषद् राजनीतिक लोकतंत्र, सामाजिक न्याय एवं आर्थिक समानता लाने के उन संवैधानिक लक्ष्य को सही मायने में प्राप्त करने के लिए प्रतिबद्ध है, जिसके लिए हमारे आजादी आंदोलन के नायकों ने भारत को ब्रिटिश शासन के गुलामी की जंजीरों से मुक्त कर 'स्वराज (स्व-शासन)' लाने का सपना देखा और अपने जीवन का बलिदान किया।

राष्ट्रीय स्वराज परिषद् का उद्देश्य आजादी आंदोलन के अपने महान नायकों की यादों और उनके बलिदान को मन-मस्तिष्क में अक्षुण्ण बनाए रखने के लिए; आजादी की लड़ाई के दौरान उनके द्वारा व्यक्त पवित्र विचारों पर अध्ययन एवं अनुसंधान को बढ़ावा देने के लिए; और इन सुधारवादी विचारों को शासन प्रणाली में  का समावेश करने के लिए कार्य करना है, ताकि भारत में सुराज (सुशासन) लाने के उद्देश्य को प्राप्त किया जा सके। 

राष्ट्रीय स्वराज परिषद् लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक के इस विचार से प्रेरणा प्राप्त करता है: "स्वराज क्या है? एक व्यक्ति कहेगा कि जवाब आसान है कि स्वराज हमारा अपना शासन है। किन्तु आपका अपने शासन से क्या आशय है? क्या यह हमारे समुदाय का, हमारे धर्म का और हमारे उन कुलीनों या राजा का शासन है, जो हमारे धर्म से संबंधित है? जब संप्रभुता और समान धर्म या समुदाय से जुड़े विषय  और सरकार लोगों के कल्याण के लिए हमेशा प्रयास करते हैं तो लोग इसे स्वराज मान सकते हैं। किन्तु यदि स्वदेशी सरकार लोगों की जरूरतों के प्रति दमनकारी या अनभिज्ञ हो जाता है तो लोग ऐसे शासन का तिरस्कार करने लगते हैं।" (लेख - स्वराज्य और सुराज्य)

राष्ट्रीय स्वराज परिषद् की ताकत अपने राष्ट्रगान में संविधान के पवित्र शब्द 'हम भारत के लोग...' को अपनाते हुए सुधारात्मक दृष्टिकोण वाला "जन-गण-मन जन-नायक जय हे, भारत राष्ट्र हमारा' है न कि 'जन- गण-मन अधिनायक जय हे, भारत भाग्य विधाता' है।

राष्ट्रीय स्वराज परिषद्, भारत के शासन को छद्म धर्मनिरपेक्षता के बजाय सच्ची धर्मनिरपेक्षता के अनुरूप बनाने हेतु अनुच्छेद 44 को लागू करने एवं इस दिशा में सार्थक अनुसंधान एवं कार्य करने के लिए; प्रत्येक नागरिक को समान रूप से बुनियादी शिक्षा उपलब्ध कराकर शिक्षा-सुधार के लिए; संस्थागत सुधार; चुनाव सुधार; राजनीतिक दलों में सुधार; न्यायिक सुधार; पुलिस सुधार; जेल सुधार; जातिमुक्त समाज को बढ़ावा देकर सामाजिक सुदृढ़ता; आर्थिक न्याय एवं समानता आधारित भूमि सुधार; लैंगिक न्याय; कृषि सुधार; राष्ट्रीय भाषा एवं संयुक्त राष्ट्र की भाषा के रूप में हिंदी भाषा का प्रोत्साहन एवं प्रचार-प्रसार; और ऐसे सभी रचनात्मक कार्य, जो राष्ट्र की एकता और अखंडता को बनाए रखने के लिए आवश्यक हैं, को करने के लिए प्रतिबद्ध है।

जय स्वराज, जय सुराज

 

Rashtriya Swaraj Parishad (RSP) is an organization committed to attain the constitutional goal of bringing the political democracy, social justice, and economic equality in the true sense for which our freedom fighter dreamed and sacrificed their life to bring the ‘Swaraj (स्वराज, - Self Governance)’ by freeing India from the slavery chain of the British regime.

Rashtriya Swaraj Parishad aims to work for keeping the memory of our great freedom fighter and their sacrifices afresh; for promoting the study and research on their pious views expressed during the freedom fight; and for enriching our governing system with these pious reformative views so that the object of bringing the Suraaj (Good Governance) in India may be achieved.

Rashtriya Swaraj Parishad get inspiration from the words of Lokmanya Bal Gangadhar Tilak : 'What is Swaraj? One would say answer is simple Swaraj is our own rule. But what do you mean by our rule? Is it the rule of our community, our religion, and our aristrocrats or of the king who belongs to our religion? When the sovereign and the subjects belong to the same religion or community and the government always strives for the welfare of the people then people can consider it as Swaraj. But if the indigenous government turns oppressive or ignorant of people's needs then people start despising such rule. (Article - Swarajya And Surajya)

Strength of Rashtriya Swaraj Parishad is the 'Jan-Gan-Man Jan-nayak Jai Hey, Bharat Rashtra Hamara' rather 'Jan-Gan-Man Adhinayak Jay Hei, Bharat Bhagya Vidhata' with reformative approach to adopt the pious words of the Constitution 'We the People of India...' in its National Anthem.

Rashtriya Swaraj Parishad is committed to do valuable research and work for implementing Article 44 to make the governance of India as per the true secularism rather pseudo secularism; Education reform by making basic education available for every citizen equally; Institutional reform; Electoral reform; Reform in Political Parties; Judicial reform; Police reform; Jail reform; Social solidarity by promoting to make a caste-less society; Economic justice and land reform based on equality; Gender Justice; Agricultural reform; Promoting and propagating the Hindi language as the National language and language of United Nation; and to do all the constructive work, which are necessary to maintain the unity and integrity of the nation.

Jai Swaraj, Jai Suraaj